संहार

अन्याय सहन कधी करायचा नसतो . त्याविरोधात लढायच असतं … त्यावरच सुचलेली कविता. …

Yk’s_
दुर्जनोंका संहार करू
ना युही सहता रहू

राह के पथ्थर वही
ना युही देखता रहू

सब्र की सीमा वही
ना युही बैठा रहू

अन्याय से लढता वही
ना कही छुपता रहू

लांघकर सिमा को यू
दुर्जनोंका संहार करू

चुप ना यु बैठा युही
अन्याय से लढता रहू

दुर्जनोंका संहार करु
ना युही सहता रहू
– योगेश खजानदार

आठवण

  प्रेम म्हटलं की ओढ असते ,तो दुरावा अगदी असह्य होऊन जातो. प्रेमावर ही मला सुचलेली छोटी कविता .. पहा तुमच्याही आठवणी जाग्या होतील …
Yk’s_
धुंध त्या सांजवेळी
मन सैरभैर फिरत
आठवणींना वाट मिळे
डोळ्यात दिसत
तु आहेस ही जाणीव
तु नाहीस हा भास
मनही हल्ली गंमत करत
तु येशील म्हणून
वाट पाहत असत
माझच हे मन
नाव तुझच असत
सांग या वेड्या मना
जगन असच असत
ओढ आयुष्यभराची
प्रेम दोन क्षणांच असत

धुंध त्या सांजवेळी
मन सैरभैर फिरत
-योगेश खजानदार

क्या सोच रहा है तु …

Yk’s. …
सोच रहा है तु
क्या करना है
सवाल में उलझे
क्या जवाब है

जिना है बेबस
बंद जैसे कमरा है
या फिर जिना जैसे
बेफिकीर समा है

सब कुछ है यहा
क्या तु मांगता है
रेत हाथसे फिसलना
वक्त यही केहता है

क्यु सोच रहा है तु
क्या करना है …. …

-योगेश खजानदार

विचार करत बसायला आयुष्य खुप छोट आहे. म्हणून जास्त विचार नाही करायचा बिनधास्त रहायच ….. :):):):)

दुनिया का मुझसे क्या

✨✨✨✨✨✨

दुनिया का मुझसे क्या

चलता हु अपने धुन
करना जो कहे मन
सवाल ना पुछो
दुनिया का मुझसे क्या

सब यहा झुट
सब कहे मेरी सुन
अरे तु मेरी सुन
दुनिया का मुझसे क्या

भगवान की प्यारी
ये सारी दुनियाँ हमारी
बिगड गई दुनियादारी
भगवान भी कहे अब
दुनिया का मुझसे क्या.

-योगेश खजानदार

✨✨✨✨✨

साथ

ही कविता रुसलेल्या कोणासाठी … 🙂

क्यों न चले हम साथ
दुनिया तो छोटी है
मिलते रहे हम यहा
समय की कमी है

ना करो नफरत
ये सब झूठी है
प्यार बाटले
समय की कमी है

मै चलु तुम चलो
जिंदगी हसीन है
छोडिये शिकवे
समय की कमी है

साथ जाये छुट
आॅखो मे नमी है
चल हाथ थाम मेरा
समय की कमी है …
-योगेश खजानदार

भलाई

सब जहा बिका मौत ना बिक पाई
क्यु तु खामखा दुनिया करे लढाई
आज तु है कल कोई और होगा
जितेजी तु दुनिया से कर भलाई
मिट जाये तेरा वजुद नाम रेह जायेगा
दो बुंद ऑसू के फिर दुनिया से मिट जायेगा
ये कल ना तेरा था आज ना तेरा है
फिर किस लिये चले तेरी ये लढाई
चल थाम इन्सानियत का हाथ
बाटले खुशियां अपने दोनो हाथ
इसमें ही है तेरी भलाई
-योगेश खजानदार

दोन ओळी मनातील…..

हे ईश्वर पता है मुझे
आज तु रोता होगा
इन्सानियत बिक गई
खुदसे तु केहता होगा

तेरा वजुद बट गया
सब यहा झुट होगा
किस दर पे जाऊ
तु जहा रेहता होगा

हे ईश्वर पता है मुझे
आज तु रोता होगा
-योगेश खजानदार